बूढ़ा पीपल और उसकी आखिरी चिट्ठी

बूढ़ा पीपल और उसकी आखिरी चिट्ठी

बूढ़ा पीपल और उसकी आखिरी चिट्ठी

गाँव के सबसे पुराने पीपल के नीचे बैठता था बाबा। हर शाम बच्चे उससे कहानियाँ सुनते। एक दिन बाबा नहीं आए। अगले दिन पेड़ के तने पर एक चिट्ठी चिपकी थी: “मैं जा रहा हूँ, लेकिन याद रखना – जड़ें मिट्टी में होती हैं, फल ऊपर।”

गाँव वालों ने समझा – बाबा ने जीवन का सबसे बड़ा सबक छोड़ दिया। आज भी बच्चे उस पेड़ के नीचे बैठते हैं।

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